कुम्भकोणम  

सारंगपणि स्वामी मंदिर, कुम्भकोणम

कुम्भकोणम तमिलनाडु प्रदेश में कावेरी नदी के तट पर मायावरम से 20 मील (लगभग 32 कि.मी.) की दूरी पर स्थित एक प्राचीन नगर है। प्राचीन समय में यह नगर शिक्षा का महान् केन्द्र हुआ करता था। यह स्थान दक्षिण भारत के प्रमुख तीर्थ स्थलों में से एक है। यहाँ पर कुम्भ मेले का आयोजन भी होता है।

मान्यता

कुम्भकोणम को संस्कृत में 'कुम्भघोणम' कहा जाता है। दक्षिण भारत की इस पावन भूमि पर प्रत्येक बारह वर्ष के पश्चात् कुम्भ मेले का आयोजन किया जाता है। एक मान्यता के अनुसार यह माना जाता है की ब्रह्मा ने अमृत से भरे कुम्भ को इसी स्थल पर रखा था। इस अमृत कुम्भ से कुछ बूंदे बाहर छलक कर गिर गई थीं, जिस कारण यहाँ की भूमि पवित्र हो गई। इसलिए इस स्थान को कुम्भकोणम के नाम से जाना जाता है।[1]

गांगेयकोंडा चोलापुरम मंदिर, कुम्भकोणम

प्रसिद्ध तीर्थ

तमिलनाडु के इस प्रसिद्ध तीर्थ स्थल के समीप अनेक मंदिरों को देखा जा सकता है। यहाँ पर सौ से भी ज़्यादा मंदिर स्थापित हैं। इनमें से कुछ प्रमुख मंदिर, जैसे की नदी के तट पर ही महाकालेश्वर तथा अन्य कई देव मंदिर हैं, जिसमें सुन्दरेश्वर शिवलिंग तथा मीनाक्षी जो माँ पार्वती हैं, की सुन्दर प्रतिमाएँ स्थापित हैं। इसके समीप ही महामाया का मंदिर है। लोगों की विचारधार अनुसार महामाया के मंदिर में स्थापित मूर्ति स्वयं प्रकट हुई थी।

टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. 1.0 1.1 कुम्भकोणम (हिन्दी)। । अभिगमन तिथि: 16 नवम्बर, 2012।

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