कांचीपुरम  

कांचीपुरम
कैलाशनाथ मंदिर, कांचीपुरम
विवरण कांचीपुरम उत्तरी तमिलनाडु के प्राचीन व मशहूर शहरों में से एक है।
राज्य तमिलनाडु
ज़िला कांचीपुरम
भौगोलिक स्थिति उत्तर- 12° 49' 12.00", पूर्व- 79° 42' 36.00"
मार्ग स्थिति कांचीपुरम महाबलीपुरम से लगभग 67 किमी और चेन्नई से लगभग 73 किमी. की दूरी पर स्थित है।
प्रसिद्धि कांचीपुरम सिल्क फैब्रिक और हाथ से बुनी रेशमी साड़ियों के लिए भी यह देश-दुनिया में मशहूर है।
कब जाएँ जनवरी से फरवरी और अक्टूबर से दिसम्बर
कैसे पहुँचें हवाई जहाज़, रेल, बस आदि
हवाई अड्डा चेन्नई अन्तर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा
रेलवे स्टेशन चेन्नई रेलवे स्टेशन, चेंगलपट्टु रेलवे स्टेशन
यातायात ऑटो-रिक्शा, सिटी बस
क्या देखें वरदराज पेरुमल मंदिर, एकम्बरनाथर मंदिर, कामाक्षी अम्मान मंदिर, कैलाशनाथ मंदिर
कहाँ ठहरें होटल, धर्मशाला, अतिथि ग्रह
क्या ख़रीदें सिल्क की साड़ियाँ
एस.टी.डी. कोड 04112
ए.टी.एम लगभग सभी
Map-icon.gif गूगल मानचित्र
संबंधित लेख ऊटी, महाबलीपुरम, कन्याकुमारी, चेन्नई
अन्य जानकारी कांचीपुरम 7वीं शताब्दी से लेकर 9वीं शताब्दी में पल्लव साम्राज्य का ऐतिहासिक शहर व राजधानी हुआ करती थी।
बाहरी कड़ियाँ कांचीपुरम
अद्यतन‎

कांचीपुरम उत्तरी तमिलनाडु के प्राचीन व मशहूर शहरों में से एक है। कांचीपुरम तीर्थपुरी दक्षिण की काशी मानी जाती है, जो मद्रास से 45 मील की दूरी पर दक्षिण–पश्चिम में स्थित है। कांचीपुरम को पूर्व में कांची और कांचीअम्पाठी भी कहा जाता था। यह आधुनिक काल में कांचीवरम के नाम से भी प्रसिद्ध है। कांचीपुरम को द गोल्डन सिटी ऑफ़ 1000 टेंपल भी कहा जाता है। कांचीपुरम को भारत के सात पवित्र शहरों में से एक का दर्जा भी प्राप्त है।

कांचीपुरम का अर्थ

कांची का अर्थ (ब्रह्मा), आंची का अर्थ (पूजा) और पुरम का अर्थ (शहर) होता है यानी ब्रह्मा को पूजने वाला पवित्र स्थान। शायद इसलिए यहाँ विष्णु के अनेक मंदिर स्थापित किए गये हैं, जिस कारण इसे यह नाम दिया गया है।

सप्त पुरियों में गणना

  • ऐसी अनुश्रुति है कि इस क्षेत्र में प्राचीन काल में ब्रह्माजी ने देवी के दर्शन के लिये तप किया था।
  • ऐसा माना जाता है कि जो भी यहाँ जाता है, उसे आंतरिक खुशी के साथ-साथ मोक्ष की प्राप्ति भी होती है।
  • मोक्षदायिनी सप्त पुरियों अयोध्या, मथुरा, द्वारका, माया(हरिद्वार), काशी और अवन्तिका (उज्जैन) में इसकी गणना है।
  • कांची हरिहरात्मक पुरी है। इसके दो भाग शिवकांची और विष्णुकांची हैं। सम्भवत: कामाक्षी अम्मान मंदिर ही यहाँ का शक्तिपीठ है। दक्षिण के पंच तत्वलिंगो में से भूतत्वलिंग के सम्बन्ध में कुछ मतभेद है। कुछ लोग कांची के एकाम्रेश्वर लिंग को भूतत्वलिंग मानते हैं, और कुछ लोग तिरुवारूर की त्यागराजलिंग मूर्ति को। इसका माहात्म्य निम्नलिखित हैं:-
रहस्यं सम्प्रवक्ष्यामि लोपामुद्रापते श्रृणु।

नेत्रद्वयं महेशस्य काशीकाञ्चीपुरीद्वयम्॥
विख्यातं वैष्णवं क्षेत्रं शिवसांनिध्यकाकम्।
काञ्चीक्षेत्रें पुरा धाता सर्वलोकपितामह:॥
श्रीदेवीदर्शनार्थाय तपस्तेपे सुदुष्करम्।
प्रादुरास पुरो लक्ष्मी: पद्महस्तपुरस्सरा।
पद्मासने च तिष्ठ्न्ती विष्णुना जिष्णुना सह।

सर्वश्रृगांर वेषाढया सर्वाभरण्भूषिता॥[1]
कांचीपुरम मंदिर, कांचीपुरम

टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. ब्रह्माण्डपु. ललितोपाख्यान 35

संबंधित लेख


सुव्यवस्थित लेख
और पढ़ें

वर्णमाला क्रमानुसार लेख खोज

                              अं                                                                                                       क्ष    त्र    ज्ञ             श्र   अः



"http://m.bharatdiscovery.org/w/index.php?title=कांचीपुरम&oldid=493665" से लिया गया