कनिष्क  

कनिष्क विषय सूची
कनिष्क
कनिष्क का सिक्का
पूरा नाम कनिष्क प्रथम
जन्म ज्ञात नहीं
मृत्यु तिथि 151 ई. लगभग
शासन काल 127 ई. से 140-51 ई. लगभग
शा. अवधि 13-24 वर्ष
धार्मिक मान्यता पारसी, बौद्ध
निर्माण भारत में पहले सूर्य मन्दिर की स्थापना मुल्तान में हुई थी जिसे कुषाणों ने बसाया था। पुरातत्वेत्ता कनिंघम का मानना है कि मुल्तान का सबसे पहला नाम कासाप्पुर था और उसका यह नाम कुषाणों से सम्बन्धित होने के कारण पड़ा।
पूर्वाधिकारी विम कडफ़ाइसिस
उत्तराधिकारी हुविष्क
वंश कुषाण वंश
विशेष कनिष्क ने भारत में कार्तिकेय की पूजा को आरम्भ किया और उसे विशेष बढ़ावा दिया। उसने कार्तिकेय और उसके अन्य नामों-विशाख, महासेना, और स्कन्द का अंकन भी अपने सिक्कों पर करवाया।
अन्य जानकारी कनिष्क को कुषाण वंश का तीसरा शासक माना जाता था किन्तु राबाटक शिलालेख के बाद यह चौथा शासक साबित होता है।

कनिष्क (अंग्रेज़ी: Kanishka, शासनकाल- 127 ई. से 140-51 ई. लगभग) कुषाण वंश का प्रमुख सम्राट् था। कनिष्क भारतीय इतिहास में अपनी विजय, धार्मिक प्रवृत्ति, साहित्य तथा कला का प्रेमी होने के नाते विशेष स्थान रखता है। यूची क़बीले से निकली यूची जाति ने भारत में कुषाण वंश की स्थापना की और भारत को कनिष्क जैसा महान् शासक दिया। विम कडफ़ाइसिस के बाद कुषाण साम्राज्य का अधिपति कौन बना, इस सम्बन्ध में इतिहासकारों में बहुत मतभेद था लेकिन राबाटक शिलालेख [1] के मिलने के बाद कनिष्क का वंश वृक्ष स्पष्ट हो जाता है। वैसे तो सभी कुषाण राजाओं के तिथिक्रम का विषय विवादग्रस्त है, और अनेक इतिहासकार राजा कुजुल और विम तक को कनिष्क का पूर्ववर्ती न मानकर परवर्ती मानते थे, पर अब बहुसंख्यक इतिहासकारों का यही मत है, कि कनिष्क ने कुजुल और विम के बाद ही शासन किया, पहले नहीं। विम कडफ़ाइसिस के राज्य काल का अन्त लगभग 100 ई. के लगभग हुआ था, और कनिष्क 127 ई. के लगभग कुषाण राज्य का स्वामी बनने का अन्दाज़ा लगता है। इस बीच के कुषाण इतिहास को अज्ञात ही समझना चाहिए।

इतिहास

कनिष्क का इतिहास जानने के लिए ऐतिहासिक सामग्री की कमी नहीं है। उसके बहुत से सिक्के उपलब्ध हैं, और ऐसे अनेक उत्कीर्ण लेख भी मिले हैं, जिनका कनिष्क के साथ बहुत गहरा सम्बन्ध है। इसके अतिरिक्त बौद्ध अनुश्रुति में भी कनिष्क को बहुत महत्त्वपूर्ण स्थान प्राप्त है। बौद्ध धर्म में उसका स्थान अशोक से कुछ ही कम है। जिस प्रकार अशोक के संरक्षण में बौद्ध धर्म की बहुत उन्नति हुई, वैसे ही कनिष्क के समय में भी हुई।

टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. अफ़ग़ानिस्तान के राबाटक स्थान के उत्खनन में 1993 में मिला था। यह यूनानी लिपि और बॅक्ट्रियन भाषा में है।
  2. इसका भी अब केवल चीनी अनुवाद ही प्राप्त होता है
  3. सूर्य उपासक सम्राट कनिष्क (हिंदी) JANITIHAS। अभिगमन तिथि: 13 नवम्बर, 2014।

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