एस. एम. कृष्णा  

एस. एम. कृष्णा
एस. एम. कृष्णा
पूरा नाम सोमनाहल्ली मल्लैया कृष्णा
जन्म 1 मई, 1932
जन्म भूमि मंडया ज़िला, कर्नाटक
अभिभावक एस. सी. मल्लैया
पति/पत्नी प्रेमा कृष्णा
संतान दो पुत्रियाँ
नागरिकता भारतीय
प्रसिद्धि राजनीतिज्ञ
पार्टी कांग्रेस
पद पूर्व मुख्यमंत्री (कर्नाटक), पूर्व राज्यपाल (महाराष्ट्र), विदेशमंत्री,
कार्य काल मुख्यमंत्री (1999-2004), राज्यपाल (2004-2008)
शिक्षा कला स्नातक, एल.एल.बी.
विद्यालय 'महाराजा कॉलेज' (मैसूर); 'गवर्नमेण्ट लाँ कॉलेज' (बंगलौर); 'सदर्न मेथोडिस्ट विश्वविद्यालय' (संयुक्त राज्य अमरीका); 'जाँर्ज वाशिंगटन विश्वविद्यालय'
भाषा हिन्दी, अंग्रेज़ी
अन्य जानकारी आप कर्नाटक विधानसभा के लिए 1962 में चुने गये और संसद में प्रथम बार चौथी लोकसभा में सदस्य के रूप में प्रवेश किया।
अद्यतन‎ 4:00, 6 अक्टूबर-2012 (IST)

सोमनाहल्ली मल्लैया कृष्णा (अंग्रेज़ी: S. M. Krishna; जन्म- 1 मई, 1932, मंडया, कर्नाटक) एक भारतीय राजनीतिज्ञ हैं, जिन्होंने सन 2009 के बाद से भारत सरकार में विदेश मंत्री के रूप में देश की सेवा की है। 1999 से 2004 तक एस. एम. कृष्णा कर्नाटक के मुख्यमंत्री रहे थे और वर्ष 2004 से 2008 तक वे महाराष्ट्र के राज्यपाल भी रहे। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने 22 मई, 2009 को उन्हें मंत्रिमंडल में शामिल किया और विदेश मंत्रालय का कार्यभार सौंप दिया। वे मनमोहन सिंह के मंत्रिमंडल के एक मात्र ऐसे मंत्री हैं, जो मंत्री, उप-मुख्यमंत्री, मुख्यमंत्री, राज्यपाल और तीन बार केंद्रीय मंत्री का पद संभाल चुके हैं।

जन्म तथा शिक्षा

एस. एम. कृष्णा का जन्म 1 मई, 1932 को सोमनाहल्ली ग्राम, मंडया ज़िला (कर्नाटक) में हुआ था। उनके पिता का नाम एस. सी. मल्लैया है। एस. एम. कृष्णा ने मैसूर के 'महाराजा कॉलेज' से स्नातक की उपाधि प्राप्त की थी। इसके बाद वे 'गवर्नमेण्ट लाँ कॉलेज' से क़ानून की डिग्री प्राप्त करने के लिए बंगलौर गये थे। बाद में उन्होंने संयुक्त राज्य अमरीका के डालाज में स्थित 'सदर्न मेथोडिस्ट विश्वविद्यालय' में अध्ययन प्राप्त किया और 'फ़ुलब्राइट छात्रवृत्ति' प्राप्त करके 'जाँर्ज वाशिंगटन विश्वविद्यालय' में भी अध्ययन किया। 29 अप्रैल सन 1964 को उनका विवाह प्रेमा कृष्णा जी के साथ सम्पन्न हुआ। वे दो पुत्रियों के पिता हैं।

राजनीति में प्रवेश

अमेरिका में ही एस. एम. कृष्णा की सक्रिय राजनीति में रुचि जगी। वहाँ उन्होंने जॉन एफ़ कैनेडी के राष्ट्रपति चुनाव का प्रचार भी किया था। भारत वापस आने के बाद उन्होंने एक अन्तर्राष्ट्रीय क़ानून के प्रोफ़ेशर के रूप में 'रेणुकाचार्या लाँ कॉलेज', बंगलौर में अध्यापन का कार्य किया। वे कर्नाटक विधानसभा के लिए 1962 में चुने गये और संसद में प्रथम बार चौथी लोकसभा में सदस्य के रूप में प्रवेश किया।

टीका टिप्पणी और संदर्भ

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