उस्ताद अमीर ख़ाँ  

उस्ताद अमीर ख़ाँ
उस्ताद अमीर ख़ाँ
पूरा नाम उस्ताद अमीर ख़ाँ
प्रसिद्ध नाम उस्ताद अमीर ख़ाँ साहब
जन्म 15 अगस्त, 1912
जन्म भूमि इंदौर, मध्य प्रदेश
मृत्यु 13 फ़रवरी, 1974
मृत्यु स्थान कलकत्ता (अब कोलकाता) पश्चिम बंगाल
अभिभावक चंगे ख़ान (दादा), शाहमीर ख़ान (पिता)
कर्म भूमि भारत
कर्म-क्षेत्र शास्त्रीय गायन
मुख्य फ़िल्में 'बैजू बावरा', 'शबाब', 'झनक झनक पायल बाजे', 'रागिनी', 'गूंज उठी शहनाई' आदि।
पुरस्कार-उपाधि संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार, पद्म भूषण
विशेष योगदान उस्ताद अमीर ख़ाँ ने "अतिविलंबित लय" में एक प्रकार की "बढ़त" लाकर सबको चकित कर दिया था। इस बढ़त में आगे चलकर सरगम, तानें, बोल-तानें, जिनमें मेरुखण्डी अंग भी है, और आख़िर में मध्यलय या द्रुत लय, छोटा ख़याल या रुबाएदार तराना पेश किया।
नागरिकता भारतीय
अन्य जानकारी इनके पिता शाहमीर ख़ान भिंडी बाज़ार घराने के सारंगी वादक थे, जो इंदौर के होलकर राजघराने में बजाया करते थे और इनके दादा, चंगे ख़ान तो बहादुर शाह ज़फ़र के दरबार में गायक थे।

उस्ताद अमीर ख़ाँ (अंग्रेज़ी: Ustad Amir Khan, जन्म: 15 अगस्त, 1912; 13 फ़रवरी, 1974) भारत के प्रसिद्ध शास्त्रीय संगीत गायक थे। उस्ताद अमीर ख़ाँ को कला के क्षेत्र में भारत सरकार द्वारा, सन 1971 में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था।

जीवन परिचय

उस्ताद अमीर ख़ाँ का जन्म 15 अगस्त, 1912 को इंदौर में एक संगीत परिवार में हुआ था। पिता शाहमीर ख़ान भिंडी बाज़ार घराने के सारंगी वादक थे, जो इंदौर के होलकर राजघराने में बजाया करते थे। उनके दादा, चंगे ख़ान तो बहादुर शाह ज़फ़र के दरबार में गायक थे। अमीर अली की माँ का देहान्त हो गया था जब वे केवल नौ वर्ष के थे। अमीर और उनका छोटा भाई बशीर, जो बाद में आकाशवाणी इंदौर में सारंगी वादक बने, अपने पिता से सारंगी सीखते हुए बड़े होने लगे। लेकिन जल्द ही उनके पिता ने महसूस किया कि अमीर का रुझान वादन से ज़्यादा गायन की तरफ़ है। इसलिए उन्होंने अमीर अली को ज़्यादा गायन की तालीम देने लगे। ख़ुद इस लाइन में होने की वजह से अमीर अली को सही तालीम मिलने लगी और वो अपने हुनर को पुख़्ता, और ज़्यादा पुख़्ता करते गए। अमीर ने अपने एक मामा से तबला भी सीखा। अपने पिता के सुझाव पर अमीर अली ने 1936 में मध्य प्रदेश के रायगढ़ संस्थान में महाराज चक्रधर सिंह के पास कार्यरत हो गये, लेकिन वहाँ वे केवल एक वर्ष ही रहे। 1937 में उनके पिता की मृत्यु हो गई। वैसे अमीर ख़ान 1934 में ही बम्बई (अब मुम्बई) स्थानांतरित हो गये थे और मंच पर प्रदर्शन भी करने लगे थे। इसी दौरान वे कुछ वर्ष दिल्ली में और कुछ वर्ष कलकत्ता (अब कोलकाता) में भी रहे, लेकिन देश विभाजन के बाद स्थायी रूप से बम्बई में जा बसे।[1]

टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. 1.0 1.1 सुर संगम में आज - उस्ताद अमीर ख़ान का गायन - राग मालकौन्स (हिन्दी) आवाज़। अभिगमन तिथि: 22 जनवरी, 2015।
  2. 2.0 2.1 वह आवाज़ कभी भुलाई नहीं जा सकती (हिन्दी) नवभारत टाइम्स। अभिगमन तिथि: 22 जनवरी, 2015।
  3. जोशी, प्रभु। महान गायक उस्ताद अमीर ख़ाँ (हिन्दी) अभिव्यक्ति। अभिगमन तिथि: 22 जनवरी, 2015।

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