उदकवाद्य कला  

जयमंगल के मतानुसार चौंसठ कलाओं में से यह एक कला है। इस कला के अन्तर्गत जल की तरंगों के तरीके से है। इसका अर्थ जलतंरग बजाने से भी लिया जाता है।


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