उड़िया साहित्य  

उड़िया साहित्य अर्थात् 'उड़िया भाषा का रचना संसार'। भारतीय इतिहास में 14वीं शताब्दी का काल उड़िया साहित्य के लिए काफ़ी रचनात्मक रहा। मध्यकालीन प्रसिद्ध उड़िया कवि जगन्नाथदास थे, जो बंगाल के वैष्णव संत चैतन्य के 16वीं सदी के शिष्य थे। ब्रिटिश शासन तथा भारत की आज़ादी के बाद बदलते परिवेश के साथ ही उड़िया साहित्य के स्वरूप में भी बदलाव आया।

इतिहास

'मादल-पांजी' के रूप में एक क्षेत्रीय भारतीय-आर्य भाषा में सबसे पुराना गद्य उड़िया भाषा में मिलता है, जो पुरी के महान् जगन्नाथ मंदिर का इतिहास है। इसका काल 12वीं शताब्दी का है, लेकिन इसे साहित्यिक रचना नहीं कहा जा सकता। 14वीं शताब्दी का काल उड़िया साहित्य के लिए काफ़ी रचनात्मक रहा। इस काल की रचनाओं में अज्ञात लेखक द्वारा रचित 'कैलास-चौतिशा', जिसमें भगवान शिव और पार्वती के विवाह के 34 पद हैं तथा सरलदास रचित प्रख्यात 'चंडी-पुराण' उल्लेखनीय है। इसके बाद 'भक्ति काल' एक बार फिर प्रेरणादायक रहा; इसमें सबसे प्रख्यात मध्यकालीन उड़िया कवि जगन्नाथदास थे, जो बंगाल के वैष्णव संत चैतन्य के 16वीं सदी के शिष्य थे तथा जिन्होंने अपने जीवन का अधिकांश हिस्सा पुरी में बिताया था। जगन्नाथदास की कई कृतियों में संस्कृत के भागवतपुराण का रूपांतरण भी शामिल है, जो उड़ीसा में आज भी लोकप्रिय है।[1]

स्वरूप में बदलाव

आज़ादी के बाद बदलते परिवेश के साथ उड़ीसा के साहित्य के स्वरूप में भी बदलाव आया। पुरानी ज़मींदारी प्रथा के अंग और नए आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक परिवर्तनों की छाया का प्रभाव उड़िया साहित्य पर स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। इन्हीं परिस्थितियों का अपने साहित्य में जीवंत चित्रण कर उड़िया साहित्यकारों ने अपनी विरासत को और भी समृद्ध बनाया। जहां सुरेंद्र मोहंती के 'अंध दिगंत' (अंधी दिशाएं), लक्ष्मीधर नायक के 'हरे दुर्भागा देश' (ओ देश के दुर्भाग्य) और चंद्रशेखर रथ के 'असूर्य उपनिबेश' (सूर्य रहित उपनगर) में उड़ीसा के सामाजिक एवं राजनीतिक दर्शन का चित्रण मिलता है, वहीं हरेकृष्ण महताब के 'तृतीय पर्ब', बृजमोहन मोहती के 'निशब्द आकाश' व 'अंध पृथ्बी', शांतनु कुमार आचार्य के 'शकुंतला', अनादि साहू के 'मुंडमेखला' और ज्ञानेश्वर मिश्र के 'नेता' में आम उड़िया लोगों के दु:ख-दर्द को अभिव्यक्ति मिली।

टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. 1.0 1.1 भारत ज्ञानकोश, खण्ड-1 |लेखक: इंदु रामचंदानी |प्रकाशक: एंसाइक्लोपीडिया ब्रिटैनिका (इण्डिया) प्राइवेट लिमिटेड, नई दिल्ली |संकलन: भारतकोश पुस्तकालय |पृष्ठ संख्या: 196 |
  2. हिन्दी विश्वकोश, खण्ड 2 |प्रकाशक: नागरी प्रचारिणी सभा, वाराणसी |संकलन: भारत डिस्कवरी पुस्तकालय |पृष्ठ संख्या: 59 |

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