इन्द्र कुमार गुजराल  

इन्द्र कुमार गुजराल
इन्द्र कुमार गुजराल
पूरा नाम इन्द्र कुमार गुजराल
अन्य नाम आई.के. गुजराल
जन्म 4 दिसम्बर, 1919
जन्म भूमि झेलम, ब्रिटिश भारत
मृत्यु 30 नवम्बर, 2012
मृत्यु स्थान गुड़गाँव, हरियाणा
अभिभावक अवतार नारायण गुजराल और पुष्पा गुजराल
पति/पत्नी शीला देवी
संतान दो पुत्र- नरेश एवं विशाल
नागरिकता भारतीय
प्रसिद्धि भारत के बारहवें प्रधानमंत्री
पार्टी कांग्रेस (1988 तक), जनता दल (1988 - 2012)
पद प्रधानमंत्री, वित्त मंत्री, विदेश मंत्री
कार्य काल प्रधानमंत्री- 21 अप्रैल, 1997 - 19 मार्च, 1998

वित्त मंत्री- 21 अप्रैल, 1997 - 19 मार्च, 1998
विदेश मंत्री- 1 जून, 199619 मार्च, 1998

अन्य जानकारी गुजराल विदेश नीति के विशेषज्ञ थे, इस कारण इन्होंने पाकिस्तान से सम्बन्ध सुधारने के कूटनीतिक प्रयास किए।

इन्द्र कुमार गुजराल (अंग्रेज़ी: Inder Kumar Gujral, जन्म: 4 दिसम्बर, 1919; मृत्यु: 30 नवम्बर, 2012) भारत के बारहवें प्रधानमंत्री थे। यह उस समय प्रधानमंत्री बने जब कांग्रेस की समर्थन वापसी के भय से संयुक्त मोर्चा सरकार ने नेतृत्व परिवर्तन की उसकी मांग स्वीकार कर ली। तब एच. डी. देवगौड़ा को 10 माह के पश्चात् प्रधानमंत्री का पद छोड़ना पड़ा। उन्होंने 21 अप्रैल, 1997 को अपने पद से त्यागपत्र दे दिया और इसी दिन इन्द्र कुमार गुजराल प्रधानमंत्री के पद पर नियुक्त हो गए। लेकिन यह भी ज़्यादा समय तक प्रधानमंत्री के पद को सुशोभित नहीं कर सके। 19 मार्च, 1998 को कांग्रेस द्वारा समर्थन वापस लिए जाने के बाद उन्हें भी पद छोड़ना पड़ा। इस प्रकार इन्द्र कुमार गुजराल लगभग एक वर्ष तक भारत के प्रधानमंत्री रहे।

जन्म एवं परिवार

इन्द्र कुमार का जन्म 4 दिसम्बर, 1919 को झेलम में हुआ था, जो उस समय पंजाब प्रान्त का अविभाजित हिस्सा था। इनके पिता का नाम अवतार नारायण गुजराल तथा माता का नाम श्रीमती पुष्पा गुजराल था। इन्द्र कुमार गुजराल का विवाह 26 मई, 1946 को शीला देवी के साथ सम्पन्न हुआ। इनके पिता अवतार नारायण गुजराल ने भारत के स्वाधीनता संग्राम में हिस्सा लिया था। श्री इन्द्र कुमार गुजराल स्वयं 12 वर्ष की उम्र में ही स्वतंत्रता संग्राम में भाग लेने लगे थे। 1931 में इन्हें ब्रिटिश पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। युवा बच्चों को शासन के विरुद्ध भड़काने के आरोप में पुलिस ने उन्हें बुरी तरह से पीटा। यह सब झेलम में ही हुआ था। फिर 1942 में भारत छोड़ो आन्दोलन के समय 23 वर्ष की उम्र में इन्हें जेल भी जाना पड़ा। गुजराल ने बी. कॉम., एम. ए., पी. एच. डी. एवं डी. लिट्. की उपाधियाँ प्राप्त की हैं। वह धारा प्रवाह उर्दू बोलते हैं और उर्दू काव्य में भी उनका योगदान रहा। इनके भाई सतीश गुजराल विख्यात पेंटर और शिल्पकार हैं। इनकी पत्नी शीला देवी कवयित्री एवं लेखिका हैं। इनके दो पुत्र नरेश एवं विशाल हैं। इनकी दो पौत्रियाँ दीक्षा और दिव्या तथा एक पौत्र अनिध्य गुजराल हैं।

टीका टिप्पणी और संदर्भ

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