आवर्त सारणी  

इस प्रकार कुल समूहों की संख्या 16 होती है जो इस प्रकार हैं- IA, IIA, IIIB, IVB, VB, VIB, VIIB, VIIIB, IB, IIB, IIIA, IVA, VA, VIA, VIIA, Zero.

आवर्त सारणी ऐसी सारणी हे जिसमें तत्वों का क्रमबद्ध समूहों में वर्गीकरण रहता है तथा समान गुणवाले तत्व क्षैतिज अथवा उर्ध्वाधर अनुक्रम से संबंधित स्थानाें पर पाए जाते हैं। इस सारणी से ज्ञात तत्वों के अज्ञात गुणों के अतिरिक्त अज्ञात तत्वों के गुण भी, सारणी में उनकी स्थिति देखकर बताए जा सकते हैं।

इतिहास-भारत, अरब और युनान के समान पुराने देशों में चार या पांच तत्व माने जाते थे--छिति-जल-पावक-गगन-समीरा (तुलसी), अर्थात्‌ पृथिवी, जल, तेज, वायु, और आकाश। पर बॉयल (1627-91) ने तत्त्वों की एक नई परिभाषा दी, जिससे रसायनज्ञों को रासायनिक परिवर्तनों और प्रतिक्रियाओं के समझने में बड़ी सहायता मिली। साथ ही साथ बॉयल ने यह भी बताया कि तत्वों की संख्या सीमित नहीं मानी जा सकती। इसका फल यह हुआ कि शीघ्र ही नए नए तत्वों की खोज होने लगी और 18वीं सदी के अंत तक तत्वों की संख्या 60 से अधिक पहुँच गई। इसमें से अधिकांश तत्व ठोस थे; ब्रोमीन और पारद से समान कुछ तत्व साधारण ताप पर द्रव भी पाए गए और हाइड्रोजन, आक्सिजन आदि तत्व गैस अवस्था में थे। ये सभी तत्व धातु और अधातु दो वर्गो में भी बांटे जा सकते थे, पर कुछ तत्वों, जैसे बिसमथ और ऐंटीमनी, के लिए यह कहना कठिन था कि ये धातु हैं या अधातु।

तत्वों की आवर्त सारणी यह जुलियस टामसेन द्वारा निर्मित की गई थी और यहाँ कुछ संशोधित रूप में दी गई है। प्रत्येक स्तंभ एक आवर्त प्रदर्शित करता है। समान गुणधर्म के तत्वों को रेखाओं से संबंधित किया गया है।

रसायनज्ञों ने इन तत्वों के संबंध में ज्यों-ज्यों अधिक अध्ययन किया, उन्हें यह स्पष्ट होता गया कि कुछ तत्व गुणधर्मो में एक दूसरे से बहुत मिलते जुलते हैं, और इन समानताओं के आधार पर उन्होंने इनका वर्गीकरण करने का प्रयत्न किया। डाल्टन का परमाणु वाद प्रतिपादित होने के अनंतर ही इन तत्वों के परमाणुभार भी निकाले गए थे। सन्‌ 1820 में डोबेराइनर ने यह देखा कि समान गुणवाले तत्व तीन तीन के समूहों में पाए जाते हैं जिन्हें त्रिक (ट्रायड) कहा गया। ये त्रिक दो प्रकार के थे-पहले प्रकार के त्रिकों में तीनों तत्वों के परमाणुभार लगभग परस्पर बराबर थे, जैसे लोह (55.84), कोबाल्ट (58.94) और निकेल (58.69) में अथवा ऑसमियम (190.2), इरीडियम (193.1) और प्लैटिनम (195.25) में। दूसरे प्रकार का त्रिकों में बीचवाले तत्व का परमाणुभार पहले और तीसरे तत्वों के परमाणुभारों का मध्यमान या औसत था, जैसे क्लोरीन (35.5), ब्रोमीन (80) और आयोडीन (127) में ब्रोमीन तत्व का परमाणु क्लोरीन और आयोडीन के परमाणुओं के जोड़ के आधे के लगभग है।

टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. हिन्दी विश्वकोश, खण्ड 1 |प्रकाशक: नागरी प्रचारिणी सभा, वाराणसी |संकलन: भारत डिस्कवरी पुस्तकालय |पृष्ठ संख्या: 451-55 |
  2. सं.ग्रं.-जे.डब्ल्यू. मेलर: ए कॉम्प्रिहेंसिव ट्रीटिज़ ऑन इनॉर्गेनिक ऐंड थ्योरेटिकल केमिस्ट्री (1922); ई. रैबिनोविटश और ई. थिलो: पीरिओडिशेस सिस्टेम (स्टुट गार्ट 1930)।

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