आचार्य प्यारे मोहन  

राष्ट्रभक्त

प्यारे मोहन लोगों को निरंतर विदेशी दासता के विरुद्ध प्रेरित किया करते थे। उनको इस काम से हटाने के लिए अंग्रेज़ सरकार ने कई बार प्रलोभन दिए। सरकार उन्हें डिप्टी मजिस्ट्रेट बनाना चाहती थी, पर आचार्य ने अधिकारियों को लिख दिया कि- "यदि मुझे वाइसराय का पद ग्रहण करने के लिए भी कहा जाए तो मैं उसे भी ठुकरा दूँगा"।

निधन

राष्ट्रभक्त प्यारे मोहन का 29 वर्ष की उम्र में ही दिसंबर, 1881 ई. में देहांत हो गया।


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टीका-टिप्पणी और संदर्भ

  1. भारतीय चरित कोश |लेखक: लीलाधर शर्मा 'पर्वतीय' |प्रकाशक: शिक्षा भारती, मदरसा रोड, कश्मीरी गेट, दिल्ली |संकलन: भारतकोश पुस्तकालय |पृष्ठ संख्या: 482 |

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