आग्नेय भाषापरिवार  

आग्नेय भाषापरिवार संसार की विभिन्न भाषाओं की तुलना कर, उनमें पाई जाने वाली समानताओं एवं ऐतिहासिक संबंध के आधार पर उन्हें विभिन्न समूहों में विभाजित किया गया है। संबंधित भाषाओं के ऐसे समूहों को 'भाषापरिवार' कहा जाता है। संसार के ऐसे भाषापरिवारों में प्रसिद्ध परिवर है 'आग्नेय परिवार'।

आग्नेय का अर्थ है अग्निदिशा (पूर्व एवं दक्षिण दिशा के मध्य) से संबंधित अथवा अग्निदिशा में स्थित। अत: आग्नेय भाषापरिवार से तात्पर्य ऐसे भाषापरिवार से है जिसकी भाषाएँ मुख्य रूप से पूर्व एवं दक्षिण के मध्य बोली जाती हैं। इस परिवार का प्रसिद्ध नाम 'आस्ट्रोएशियाटिक' है। पेटर श्मिट ने 'आस्ट्रोनेशियन' अथवा 'मलय-पालीनेशन' (द्र. 'आस्ट्रोनेशियन') परिवार को आस्ट्रो--एशियाटिक परिवार से जोड़कर एक बृहत्‌ भाषापरिवार की कल्पना की जिसे उन्होंने 'आस्ट्रिक' परिवार का नाम दिया। क्षेत्र की दृष्टि से आस्ट्रिक परिवार संसार का सबसे विस्तृत भाषापरिवार है। पश्चिम में मैडागास्कर से लेकर पूर्व में पूर्वी द्वीपसमूह तक तथा उत्तर पश्चिम में पंजाब के उत्तरी भाग से लेकर दक्षिण पूर्व में न्यूज़ीलैंड तक इस भाषापरिवार का फैलाव है।

इस प्रकार आस्ट्रिक परिवार के मुख्य दो वर्ग हैं-(1) आस्ट्रोनेशियन, (2) आस्ट्रो-एशियाटिक। आस्ट्रोनेशियन अथवा मलय-पोली-नेशियन वर्ग की भाषाएँ प्रशांत महासागर के द्वीपों में फैली हुई हैं। इन भाषाओं के भी कई समूह हैं, : इंडोनेशियन, मलेनेशियन, मैक्रोनेशियन एवं पोलीनेशियन। आस्ट्रोनेशियन वर्ग के विवेचन में न्यूगिनी एवं आस्ट्रेलिया की कुछ मूल भाषाओं का भी उल्लेख किया जाता है क्योंकि इन भाषाओं में कुछ विशेषताएँ आस्ट्रोनेशियन वर्ग की हैं।

आस्ट्रो-एशियाटिक वर्ग की भाषाएँ मध्यभारत के छोटा नागपुर प्रदेश से लेकर अनाम तक फैली हुई हैं। इसकी मुख्य तीन शाखाएँ हैं:

टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. हिन्दी विश्वकोश, खण्ड 1 |प्रकाशक: नागरी प्रचारिणी सभा, वाराणसी |संकलन: भारत डिस्कवरी पुस्तकालय |पृष्ठ संख्या: 353-54 |

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