आंग्ल नॉरमन साहित्य  

आँग्ल-नॉरमन साहित्य रोमन विजय के बहुत पहले आर्यों के कुछ प्रारंभिक कबीले इंग्लैंड के दक्षिण एवं दक्षिण पश्चिम भागों में बस चुके थे। इन कबीलों में पहले तो गॉल तथा ब्राइटन आए, फिर रोमन आए। तत्पश्चात्‌ सैक्सन और डेन आए और अंत में नॉर्मन आए।

इतिहास से हमें लोगों के स्थानांतरण की कथा मालूम पड़ती है। इन स्थानांतरणों के अनेक कारण हैं, लेकिन फिर भी हम उन्हें ढूंढ़ने का प्रयत्न करते हैं और विश्लेषण के बाद हम ऐसे तथ्य पाते हैं जिनकी व्याख्या नहीं की जा सकती। जो लोग शताब्दियों से एक स्थान पर सुख दु:ख झेलते हुए रहते आए हैं वे अचानक विचित्र आकांक्षाओं से प्रेरित होकर बड़े-बड़े पहाड़ों, तीव्रगामी नदियों और वीरान रेगिस्तानों को पार करने के लिए कटिबद्ध हो जाते हैं। इसके पीछे आर्थिक एवं भौगोलिक (ऋतु संबंधी) कारण हैं, किंतु कुछ और भी बातें हैं जो इनसे भिन्न हैं। चंगेज खां की भांति एक बड़ा नेता उठ खड़ा होता है और लोगों में एक नया जोश का दौर आ जाता है। उनमें अस्थिरता हो जाती है। वे अपने पुराने घरों में बैठै-बैठै कुपित और विचलित हो उठते हैं।

यही बात जर्मनिक कबीले के साथ घटी थी। वे योद्धा थे। वे लंबे तड़गे, चौडी हड्डियों तथा नीली आँखों वाले क्रूर व्यक्ति थे। वे रोमन सैन्यदल के विरुद्ध लोहा लेते रहे तथा शताब्दियों के कठिन संग्राम के बाद, अंत में, रोमन प्रतिरक्षा के कवच को भेदते हुए समस्त पश्चिमी यूरोप में फैल गए।

ये भयंकर विजेता तरंगों की भाँति अपने सुनसान और उजाड़ घरों से बाहर की ओर पश्चिम के हरे भरे संसार में आ निकले। जिन्होंने उनका प्रतिरोध किया वे नष्ट हो गए और जिन्होंने उनके प्रभुत्व को स्वीकार किया वे या तो दास थे या गँवार। इसके तुरंत बाद अपनी लंबी काली नावों पर सवार होकर इंगलिश चैनल नामक क्षुब्ध जलरेखा को उन्होंने पार किया और श्येनाक्ष कप्तानों के नेतृत्व में उत्तरी सागर में भी आगे बढ़े। फिर, विशेष नरसंहार के पश्चात्‌ इंग्लैंड की उस जनता पर अधिकार जमाया जो रोमनों के आने के बाद यत्र-तत्र बड़ी असहाय स्थिति में रह गई थी। वे दक्षिण के समृद्ध भागों में, वहाँ के मूल निवासियों को मार भगाकर, जा बसे।

टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. हिन्दी विश्वकोश, खण्ड 1 |प्रकाशक: नागरी प्रचारिणी सभा, वाराणसी |संकलन: भारत डिस्कवरी पुस्तकालय |पृष्ठ संख्या: 322-24 |

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