अलीगढ़ आन्दोलन  

सर सैय्यद अहमद ख़ाँ

अलीगढ़ आन्दोलन की शुरुआत अलीगढ़ (उत्तर प्रदेश) से हुई थी। इस आन्दोलन के संस्थापक सर सैय्यद अहमद ख़ाँ थे। उन्होंने 'पीरी-मुरीदी प्रथा'[1] एवं 'दास प्रथा' को समाप्त करने का प्रयत्न किया। सर सैय्यद अहमद ख़ाँ ने 1875 ई. में अलीगढ़ में एक ‘ऐंग्लो मुस्लिम स्कूल’ जिसे 'ऐंग्लों ओरियन्टल स्कूल' भी कहा जाता था, की स्थापना की। इस केन्द्र पर मुस्लिम धर्म, पाश्चात्य विषय तथा विद्वान् जैसी सभी विषयों की शिक्षा दी जाती थी।

आन्दोलन के नेता

दिल्ली में पैदा हुए सैय्यद अहमद ने 1839 ई. में ईस्ट इंडिया कम्पनी में नौकरी कर ली। कम्पनी की न्यायिक सेवा में कार्य करते हुए 1857 ई. के विद्रोह में उन्होंने कम्पनी का साथ दिया। 1870 ई. के बाद प्रकाशित 'डब्ल्यू. हण्टर' की पुस्तक 'इण्डियन मुसलमान' में सरकार को यह सलाह दी गई थी कि वे मुसलमानों से समझौता कर तथा उन्हें कुछ रियायतें देकर अपनी ओर मिलाये। सर सैय्यद अहमद ख़ाँ द्वारा संचालित 'अलीगढ़ आन्दोलन' में उनके अतिरिक्त इस आन्दोलन के अन्य प्रमुख नेता थे-

  1. नजीर अहमद
  2. चिराग अली
  3. अल्ताफ हुसैन
  4. मौलाना शिबली नोमानी

टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. पीर लोग अपने शिष्यों को कुछ रहस्मयी शब्द देकर गुरु बन जाते थे।

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