अरबी संस्कृति  

अरबी संस्कृति अरब देश दक्षिणी पश्चिमी एशिया का सबसे बड़ा प्रायद्वीप है जो क्षेत्रफल में यूरोप के चतुर्थ तथा संयुक्त राज्य अमरीका के तृतीय भाग के बराबर है। देश के अधिकतर भाग मरुस्थल तथा पर्वतीय हैं, केवल कहीं-कहीं छोटे-छोटे स्रोत तथा खजूर के झुरमुट दीख जाते हैं। दक्षिणी पश्चिमी भाग तथा समुद्रवर्ती भूखंड उपजाऊ है जहाँ अन्नादि वस्तुओं की खेती होती है। क्षेत्रफल की तुलना में अरब की जनसंख्या न्यूनतम है।[1]

वहाँ के निवासियों को अरब कहते हैं जिनका संबंध सामी वंश से है। इसी वंश से संबंधित अन्य सभ्य जातियाँ जैसे बाबुली (बाबिलोनियन) असुरी (असीनियन), किल्दानी, अमूरी, कनानी, फिनीकी तथा यहूदी हैं।

अरब निवासियों की संस्कृति को दो कालों में विभाजित किया जाता है: प्राक्‌ इगस्लाम काल तथा इस्लामोत्तर काल। पहले को ऐतिहासिक परिभाषा में जहालत या अज्ञान का काल और दूसरे को इस्लामी काल भी कहते हैं। प्रथम काल 610 ई. के पूर्व का है तथा द्वितीय उसके पश्चात्‌ का। 610 ई. वह शुभ वर्ष है जिसमें मुहम्मद साहब को, जिनका जन्म 575 ई. में मक्का में हुआ था, ईशदौत्य (नुबुव्वत) मिला। इसी वर्ष से उनके जीवन में परिवर्तन प्रारंभ हुआ और वे नबी के नाम से पुकारे जाने लगे। इसी वर्ष से अरबों के जीवन के प्रत्येक भाग में प्रभावशाली क्रांति आई और जाहिली सभ्यता इस्लामी संस्कृति में परिवर्तित हो गई।

दक्षिणी अरब की प्राचीन सभ्यता---प्राचीन काल में ईसा से तीन शताब्दी पूर्व तीन प्रकार की सभ्यताओं के नाम इतिहास में मिलते हैं: (1) बाबुली सभ्यता, दजला और फरात की घाटी की, (2) नील घाटी की सभ्यता, प्राचीन मिस्र की, तथा (3) सिंध घाटी की सभ्यता जिसको भारत के प्राचीन निवासी द्राविड़ों ने उन्नति के शिखर पर पहुँचाया था। चूंकि दक्षिणी अरब दो प्राचीन सभ्यताओं के केंद्र बाबुल तथा मिस्र के मध्य में स्थित था तथा उसके तटवर्ती भूखंड उपजाऊ भी थे, वहाँ के निवासियों की अपनी सभ्यता थी जिसकी समानता प्राचीन बाबुली अथवा मिस्री सभ्यता से तो नहीं की जा सकती, फिर भी उसका अपना महत्व है। उपर्युक्त सभ्यताओं से वह न केवल प्रभावित थी, अपितु घनिष्ठ संबंध भी रखती थी। वहाँ के निवासी तटवर्ती भूखंड में बसने के कारण जलयान चलाने में दक्ष थे। अत: व्यापारी अपनी सामग्री तथा सांस्कृतिक संपत्ति जल थल के मार्ग द्वारा स्थानांतरित करते थे। संभव है, इसी कारण इन्हीं प्राचीन अरबों ने इसको अरब सागर की संज्ञा दी हो। अत: इस सभ्यता को यदि समुद्री सभ्यता कहा जाए तो अनुचित न होगा।

टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. हिन्दी विश्वकोश, खण्ड 1 |प्रकाशक: नागरी प्रचारिणी सभा, वाराणसी |संकलन: भारत डिस्कवरी पुस्तकालय |पृष्ठ संख्या: 223 |
  2. सं.ग्रं--एन्साइक्लोपीडिया आव इस्लाम; एन्साइक्लोपीडिया ब्रिटैनिका; हिस्ट्री ऑव अरब; अरब इन हिस्ट्री।

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