अबु उबैद  

अबू उबैद का जन्म बसरा में हुआ था। इनका पूरा नाम मडमर बिन बिल्‌मसन्नी अबू उबैद: यह यहूदी ईरानी नसल का था। इसने अपने लेखों में दयालु अरबों के विरुद्ध शुऊबी आंदोलन का साथ दिया। इस कारण कुछ लोग भूल से इसे ख़ारिज़ी (व्यक्त कहते हैं। इसके अध्ययन का विशेष विषय अरबी भाषा की बारीकियाँ, अरबी के अर्थ तथा वर्णन में नवीन योजनाएँ, अरबों का बीता हुआ इतिहास तथा उनकी आपसी विभिझताएँ एवं विरोध हैं। यह पहला आदमी है जिसने नई विधा पर पुस्तक लिखी। इसकी रचना 'मजाज़ुल्‌कुरान' प्रसिद्ध है। यह व्यंग्य तथा हास्य में भी अद्वितीय था। इतनी विद्वत्ता के रहते हुए भी यह अरबी शेरों तथा कुरान की आएतों को शुद्ध रूप में नहीं पढ़ सकता था। इसने लगभग दो सौ पुस्तकें लिखी हैं, जिनकी केवल अधूरी सूची मिलती है। खलीफ़ा हारूँ-अल्‌-रशीद के बुलाने पर यह बगदाद गया था, जहाँ असमई से इसकी खूब नोक--झोंक रही। इसकी मृत्यु सन्‌ 209 हि., सन्‌ 824 ई. में हुई।[1]



टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. हिन्दी विश्वकोश, खण्ड 1 |प्रकाशक: नागरी प्रचारिणी सभा, वाराणसी |संकलन: भारत डिस्कवरी पुस्तकालय |पृष्ठ संख्या: 168 |

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