अप्रैल फ़ूल दिवस  

अप्रैल फ़ूल दिवस
अप्रैल फ़ूल दिवस
विवरण 'अप्रैल फ़ूल दिवस' अर्थात् ‘मूर्ख दिवस’ को 1 अप्रैल के दिन विश्वभर में मौज-मस्ती और हंसी-मजाक के साथ एक-दूसरे को मूर्ख बनाते हुए मनाया जाता है।
उद्देश्य इस दिन लोग अपने मित्रों, पड़ोसियों और यहाँ तक कि घर के सदस्यों से भी बड़े ही विचित्र प्रकार के हंसी-मजाक, मूर्खतापूर्ण कार्य और धोखे में डालने वाले उपहार देकर आनंद लेते हैं।
शुरुआत अप्रैल फ़ूल की शुरुआत 17वीं सदी से हुई, परन्तु 1 अप्रैल को 'फ़ूल्स डे' के रूप मे माना जाना और लोगो लोगों के साथ हंसी मज्ज़ाक करने का सिलसिला सन् 1564 के बाद फ़्राँस से शुरू हुआ।
लोकप्रियता 'ऑल फ़ूल्स डे' के रूप में जाना जाने वाला यह दिन, 1 अप्रैल एक आधिकारिक छुट्टी का दिन नहीं है, लेकिन इसे व्यापक रूप से एक ऐसे दिन के रूप में मनाया जाता है, जिसमें एक दूसरे के साथ व्यावाहारिक मजाक और सामान्य तौर पर मूर्खतापूर्ण हरकतें की जाती हैं।
अन्य जानकारी रोम में ‘अप्रैल फ़ूल’ को फ़्राँस की भांति 7 दिनों तक मनाया जाता है और चीन की भांति बैरंग पार्सल भेज कर मूर्ख बनाया जाता है। जापान में बच्चे पतंग पर इनामी घोषणा लिख कर उड़ाते हैं। पतंग पकड़ कर इनाम मांगने वाला ‘अप्रैल फ़ूल’ बन जाता है।

अप्रैल फ़ूल दिवस अर्थात् ‘मूर्ख दिवस’ (अंग्रेज़ी: April Fool's Day) को 1 अप्रैल के दिन विश्वभर में मौज-मस्ती और हंसी-मजाक के साथ एक-दूसरे को मूर्ख बनाते हुए मनाया जाता है। इस दिन लोग अपने मित्रों, पड़ोसियों और यहाँ तक कि घर के सदस्यों से भी बड़े ही विचित्र प्रकार के हंसी-मजाक, मूर्खतापूर्ण कार्य और धोखे में डालने वाले उपहार देकर आनंद लेते हैं।

लोकप्रियता

'ऑल फ़ूल्स डे' के रूप में जाना जाने वाला यह दिन, 1 अप्रैल एक आधिकारिक छुट्टी का दिन नहीं है, लेकिन इसे व्यापक रूप से एक ऐसे दिन के रूप में जाना और मनाया जाता है, जब एक दूसरे के साथ व्यावाहारिक मजाक और सामान्य तौर पर मूर्खतापूर्ण हरकतें की जाती हैं। यह दिन मूर्ख बनकर या मूर्ख बनाकर भी मन को सुख देता है। यही अनूठा भाव ही इसकी लोकप्रियता का सबसे बड़ा कारण है। मूर्ख बनने या बनाने का अर्थ ठगने या ठगाने से नहीं है, वरन् इसका संबंध थोडा-सा सुख और आनंद पाने की उन मानवीय भावनाओं से है, जिसके लिये हर व्यक्ति जीवन में दिन-रात जूझता है। 1 अप्रैल को किसी भी मित्र को मूर्ख बनाने का अपना अलग ही मजा है। कई बार तो मूर्ख बनने वाले को काफ़ी कष्ट भी पहुँचता है। दौड़-धूप और काफ़ी खर्च करने के पश्चात् ही मूर्ख बनने वाला यह समझ जाता है कि उसे ‘अप्रैल फ़ूल’ बनाया गया है। लेकिन हर व्यक्ति को इस बात का ध्यान रखना चाहिए, कि अपने मजाक से किसी का बुरा न हो।

टीका टिप्पणी और संदर्भ

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