अंग्रेजी साहित्य  

अंग्रेजी साहित्य के प्राचीन एवं अर्वाचीन काल कई आयामों में विभक्त किए जा सकते हैं। यह विभाजन केवल अध्ययन की सुविधा के लिए किया जाता है; इससे अंग्रेजी साहित्य प्रवाह को अक्षुण्णता पर कोई प्रभाव नहीं पड़ना चाहिए। प्राचीन युग के अंग्रेजी साहित्य के तीन स्पष्ट आयाम है: ऐंग्लो-सैक्सन; नार्मन विजय से चॉसर तक; चॉसर से पुनर्जागरण काल तक।

ऐंग्लो-सैक्सन

इंग्लैंड में बसने के समय ऐंग्लो-सैक्सन कबीले बर्बरता और सभ्यता के बीच की स्थिति में थे। आखेट, समुद्र और युद्ध के अतिरिक्त उन्हे कृषि जीवन का भी अनुभव था। अपने साथ वे अपने वीरों की कथाएँ भी लेते आए। ट्यूटन जाति के सारे कबीलों में ये कथाएँ सामान्य रूप से प्रचलित थीं। वे देशों की सीमाओं में नहीं बँधी थीं। इन्हीं भाषाओं से सातवीं शताब्दी में कविता के रूप में अंग्रेजी साहित्य का प्रारंभ हुआ। इसलिए डब्ल्यू.पी. कर के शब्दों में ऐंग्लो-सैक्सन साहित्य पुरानी दुनिया का साहित्य है। लेकिन इस समय तक ऐंग्लो-सैक्सन लोग ईसाई बन चुके थे। इन भाषाओं के रचयिता भी आम तौर से पुरोहित हुआ करते थे। इसलिए इन भाषाओं में वर्णित शौर्य और पराक्रम पर धार्मिक रहस्य, विनय, करुणा, सेवा इत्यादि के भाव भी आरोपित हुए। ऐंग्लो-सैक्सन कविता का शुद्ध धर्मविषयक अंश भी इन गाथाओं के रूप से प्रभावित है

इन गाथाओं में शौर्य के साथ शैली का भी अतिरंजन है। ऐंग्लो-सैक्सन भाषा काफी अनगढ़ थी। गाथाओं में कवि उसे अत्यंत कृत्रिम बना देते थे। छंद के आनुप्रासिक आधार के कारण भरती के शब्दों का आ जाना अनिवार्य था। मुखर व्यंजनों की प्रचुरता से संगीत या लय में कठोरता है। विषयों और शैली को संकीर्णंता के बीच अंग्रेजी कविता का विकास असंभव था। नार्मन विजय के बाद इसका ऐसा कायाकल्प हुआ कि अनेक विद्वानों ने इसमें और बाद की कविता में वंशगत संबंध जोड़ना अनुचित कहा है।

दूसरी ओर अंग्रेजी गद्य में, जिसका उदय कविता के बाद हुआ, विकास की क्रमिक और अटूट परंपरा है। ईसाई संसार की भाषा लातीनी थी और इस काल का प्रसिद्ध गद्य लेखक बीड इसी भाषा में लिखता था। ऐंग्लो-सैक्सन में गद्य का प्रारंभ अलफ्रेड के जमाने में लातीनी के अनुवादों तथा उपदेशों और वार्ताओं की रचना से हुआ। गद्य की रचना शिक्षा और ज्ञान के लिए हुई थी। इसलिए इसमें ऐंग्लो-सैक्सन कविता की कृत्रिमता और अन्य शैलीगत दोष नहीं हैं। उनकी भाषा लोकभाषा के अधिक समीप थी। ऐंग्लो-सैक्सन कविता की तरह बाद वाले युगों में उसका संबंध विच्छेद करना असंभव है। लेकिन इस युग के पूरे साहित्य में लालित्य का अभाव है

नार्मन विजय से चॉसर तक

चॉसर पूर्व मध्यदेशीय अंग्रेजी काल न केवल इंग्लैंड में ही बल्कि यूरोप के अन्य देशों में भी फ्रांस के साहित्यिक नेतृत्व का काल है। १२वीं से लेकर 14वीं शताब्दी तक फ्रांस ने इन देशों को विचार, संस्कृति, कल्पना, कथाएँ और कविता के रूप दिए। धर्मयुद्धों के इस युग में सारे ईसाई देशों को बौद्धिक एकता स्थापित हुई। यह सामंती व्यवस्था तता शौर्य और औदार्य की केंद्रीय मान्यताओं के विकास का युग है। नारी के प्रति प्रेम और पूजाभाव, साहस और पराक्रम, धर्म के लिए प्राणोत्सर्ग, असहायों के प्रति करुणा, विनय आदि ईसाई नाइटों (सूरमाओं) के जीवन के अभिन्न अंग माने गए। इसी समय फ्रांस के चारणों ने प्राचीनकालीन पराक्रम गाथाओं (chanson dageste) और प्रेम गीतों की रचना की, तथा लातीनी, ट्यूटनों, केल्टी, आयरी, कार्नी और फ्रेंच गाथाओं का व्यापक उपयोग हुआ। फ्रांस की गाथाओं में कर्म की, ब्रिटेन की गाथाओं में भावुकता और श्रृंगार की ओर लातीनी गाथाओं में इन सभी तत्वों की प्रधानता थी। साहित्य में कोमलता, माधुर्य और गीतों पर जोर दिया जाने लगा।

इस युग में अंग्रेजी भाषा ने अपना रूप संवारा। उसमें रोमांस भाषाओं, विशेषत; फ्रेंच के शब्द आए, उसने कविता में कर्णकटु आनुप्रासिक छंद रचना की जगह तुर्कों को अपनाया, उसके विषय व्यापक हुए-संक्षेप में, उसने चॉसर युग की पूर्वपीठिका तैयार की।

गद्य के लिए भाषा के मँजे-मँजाए और स्थिर रूप की आवश्यकता होती है। पुरानी अंग्रेजी के रूप में विघटन के कारण इस युग का गद्य पुराने गद्य जैसा संतुलित और स्वस्थ नहीं है। लेकिन रूपगत अस्थिरता के बावजूद इस युग के धार्मिक और रोमानी गद्य में विचारों की दृष्टि से ऐंग्लो-सैक्सन गद्य की परंपरा को विकसित किया।

टीका टिप्पणी और संदर्भ

सं. ग्रं.कैंब्रिज हिस्ट्री ऑव इंग्लिश लिटरेचर; लेगुइ ऐंड कज़ामिया; हिस्ट्री ऑव इंग्लिश लिटरेचर। लेगुई ऐंड कजामिया: ए हिस्ट्री ऑव इंग्लिश लिटरेचर; क्रेक: इंग्लिश प्रोज़ राइटर्स; सेंट्सबरी: इंग्लिश प्रोज़ रिद्म। डब्ल्यू.जे. कोर्टहोप : हिस्ट्री ऑव इंग्लिश पोएट्री; कैंब्रिज हिस्ट्री ऑव इंग्लिश लिटरेचर; लेगुई ऐंड कज़ामिया ए हिस्ट्री ऑव इंग्लिश लिटरेचर; डब्ल्यू.पी. कर इंग्लिश लिटरेचर, मेडोवल; बी.डी. सोलापिंटो: दि इंग्लिश रेनेसाँ, 1510-1688; एस.जे.सी. ग्रियर्सन क्रॉस करेंट्स इन इंग्लिश लिटरेचर ऑव दि सेवेन्टीथ सेंचुरी; एडमंड गॉस हिस्ट्री ऑव एट्टीन्थ सेंचुरी लिटरेचर; सी.एच. हरफर्ड दि एज ऑव बर्ड्‌स्वर्थ; बी. आइफर इवन्स इंग्लिश पोएट्री इन दि लेटर नाइन्टीन्थ सेंचुरी; एफ.आर लिविस न्यू बेयरिंग्स इन इंग्लिश पोएट्री। अलरडाइस निक्‌ल दि थियरी ऑव ड्रामा, ब्रिटिश ड्रामा, और दि डेवलपमेंट ऑव दि थियेटर; ई.के, चैंबर्स दि एलिज़ाबेथन स्टेज; ए.एच. थार्नडाइक इंग्लिश कॉमेडी; जे.सी. ट्रेविन दि थियेटर सिंस 1900, और ड्रैमेटिस्ट्स ऑव टुडे; एलिस फर्मर आयरिश ड्रामा।

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