अंगिका  

अंगिका प्राचीन अंग महाजनपद अर्थात् भारत के उत्तर-पूर्वी एवं दक्षिण बिहार, झारखंड, बंगाल, असम, उड़ीसा और नेपाल के तराई के इलाक़ों में मुख्य रूप से बोली जाने वाली भाषा है। लगभग चार से पाँच करोड़ लोग अंगिका भाषा को मातृभाषा के रूप में प्रयोग करते हैं। यह प्राचीन भाषा कम्बोडिया, वियतनाम, मलेशिया आदि देशों में भी प्राचीन समय से बोली जाती रही है। प्राचीन समय में अंगिका भाषा की अपनी एक अलग 'अंग लिपि' भी थी।

नामकरण

प्राचीन अंग प्रदेश की भाषा को 'अंगिका' कहा जाता है। अंगिका भाषी भारत में लगभग सात लाख लोग हैं। इस भाषा का नाम 'भागलपुरी' इसकी स्थानीय राजधानी के कारण पड़ा। इसके अलावा अंगिका को 'अंगी', 'अंगीकार', 'चिक्का चिकि' और 'अपभ्रन्षा' भी कहा जाता है। अंगिका की उपभाषाएं हैं- 'देशी', 'दखनाहा', 'मुंगेरिया', 'देवघरिया', 'गिध्होरिया', 'धरमपुरिया'। अक्सर भाषा का नामकरण उसके बोले जाने के स्थान से होता है, यही हम यहाँ भी देखते हैं।[1]

टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. भागलपुरी या अंगिका.....एक विवेचना (हिन्दी) लहरें। अभिगमन तिथि: 22 जुलाई, 2014।
  2. तो क्या अंगिका मर जायेगी (हिन्दी) क्रमश:। अभिगमन तिथि: 22 जुलाई, 2014।

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